बहुत सी ख्वाहिशें हैं जिन्हें मै पाना चाहता हूं

मैं जिंदगी को समझना चाहता हूं
बहुत सी ख्वाहिशें है जिन्हें मैं पाना चाहता हूं
दिन ढलते ही बदल जाती है जिंदगी
मैं उगते सूरज को बदलना चाहता हूं
क्या कसर रह गई मेरे तपने मे
मैं आज हर जख्म का जवाब चाहता हूं

सुना है खुदी को बुलंद करने से खुदा भी रजा पूछता है
आज मैं उस बुलंदी की ऊंचाई जानना चाहता हूं
मैंने इच्छाओं को मारकर यह जहां बनाया
आज इस जहां को मारकर किस्मत आजमाना चाहता हूं
बहुत सी ख्वाहिशें हैं जिन्हें मै पाना चाहता हूं

बहुत आजमाया है तूने मुझको
आज मैं भी वक्त को आजमाना चाहता हूं
आसमान की गहराइयों में जाना चाहता हूं
सब कुछ पाना चाहता हूं
मारकर अपने हर डर को
मैं अमर हो जाना चाहता हूं
बहुत सी ख्वाहिशें हैं जिन्हें मै पाना चाहता हूं

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