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शौर्य: सत्य की खोज - परिचय खंड - तृतीया : लेखक का सफर : शौर्य का सच !

यहाँ पढ़े:  शौर्य: सत्य की खोज - परिचय खंड - प्रथम : महा युद्ध पूर्व रात्रि भाग 1 : अंतर वार्ता ! यहाँ पढ़े।  भाग -2 : शौर्य - रूद्रा वार्तालाप खण्ड - द्वितीय : शौर्य - एक ढोंगी व्यक्तित्व ! भाग - 1 : गांव का आश्रम ! भाग -2 : शौर्य का पैतृक गाँव ! यहाँ पढ़े खंड - तृतीया : लेखक का सफर : शौर्य का सच ! मेरे सफर की शुरुआत शौर्य के गाँव से होती है । किसी भी महान व्यक्ति को उसकी जन्म भूमि जरूर याद रखती है । मैं भी अपने सफर की शुरुआत उसके गाँव से करना चाहता था। हर उस जगह मैं गया , हर उस शख्स से मैं मिला जहाँ मुझे उम्मीद थी कि शौर्य के बारे में कुछ जान सकता हूँ । पूर्व से पश्चिम , उत्तर से दक्षिण , हर उस देश, हर उस स्थान को मैंने खोज निकाला जहाँ शौर्य गया होगा । कहते है, शौर्य बहुत भाग्यशाली था, वह जहाँ भी गया, जहाँ से भी गुजरा, उस स्थान पर खुशयाली आती चली गयी । आज भी दुनिया के कुछ हिस्सों में शौर्य की मुर्तिया लोग घरों में रखना शुभ समझते है । इसी दौरान मुझे उसके गाँव के बारे में कुछ जानकारी मिली । किन्तु उस नाम के तो हजारो गाँव थे । कह...

शौर्य: सत्य की खोज खण्ड - द्वितीय : शौर्य - एक ढोंगी व्यक्तित्व ! भाग -2 : शौर्य का पैतृक गाँव !

यहाँ पढ़े:  शौर्य: सत्य की खोज - परिचय खंड - प्रथम : महा युद्ध पूर्व रात्रि भाग 1 : अंतर वार्ता ! यहाँ पढ़े।  भाग -2 : शौर्य - रूद्रा वार्तालाप खण्ड - द्वितीय : शौर्य - एक ढोंगी व्यक्तित्व ! भाग - 1 : गांव का आश्रम ! भाग -2 : शौर्य का पैतृक गाँव ! यहाँ पढ़े घूमते घूमते उनकी टोली शौर्य के पैतृक गाँव में आ पहुँचती है । सच मानो ! तो शौर्य भूल ही चूका था कि उसका कोई काला अतीत भी है, जिसमें केवल हार ही हार है । शौर्य को जब तक मालूम पड़ा कि यह उसका पैतृक गाँव हैं तब तक बड़ी देर हो चुकी थी । मनुष्य जितना बड़ा हो जाता है, उसे प्रसिद्धि मिल जाती है , जितना वह सम्मान पा लेता है । उसे उतना ही दर्द होता है पल भर में उसके मिटने का । शौर्य को पता चल गया था कि उसकी यह यात्रा यही खत्म होने वाली है । लेकिन यह पता नही था कि इसका अंत इतना भयानक होने वाला है । उसके गाँव वालो ने उसका इतना अपमान किया कि सालो तक मिला सम्मान इन कुछ क्षणों के आगे चुटकी भर रह गया । शौर्य ने सब कुछ हँसते हँसते सहन कर लिया । उसने वो सारे सत्य स्वीकार किये जिनकी वजह से व...

शौर्य: सत्य की खोज खण्ड - द्वितीय : शौर्य - एक ढोंगी व्यक्तित्व ! भाग - 1 : गांव का आश्रम !

यहाँ पढ़े:  शौर्य: सत्य की खोज - परिचय खंड - प्रथम : महा युद्ध पूर्व रात्रि भाग 1 : अंतर वार्ता ! यहाँ पढ़े।  भाग -2 : शौर्य - रूद्रा वार्तालाप खण्ड - द्वितीय : शौर्य - एक ढोंगी व्यक्तित्व ! भाग - 1 : गांव का आश्रम ! कहते है ज्ञानी और सन्यासी इस संसार से परे होते है । उनका इस भौतिक माया से कोई सम्बन्ध नही होता लेकिन हमे आज तक यह समझ नही आया कि लोग सन्यासी और ज्ञानी बन कैसे जाते है । किसी महापुरुष ने कहा है कि जिसके पास धन नही वो भिक्षुक बन गया जिंदगी से हार गए तो मंदिर मस्जिद में  बैठ गए । उस खुदा के बन्दे बन गए । तक़दीर ने धोखा दिया तो नए रास्तो पर चल, मुसाफिर बन गए । सबके सब ढोंगी है । इस संसार को ढोंग नही कहेंगे तो क्या कहेंगे । हर कोई ढोंगी है यहाँ पर । हमारा यह शख्स जो शौर्य के नाम से विख्यात है , जिंदगी से हार कर, घर छोड़ कर भाग गया था । उसे उम्मीद थी कि वो एक तनाव मुक्त और व्यवस्थित जिंदगी जी सकेगा । किन्तु उसे ज्ञात नही था कि इस दुनिया का कोई भी ऐसा रास्ता नही है जो मुश्किलो और दुखो से घिरा हुआ नही है । करीबन एक साल तक दर भदर भ...

शौर्य: सत्य की खोज खंड - प्रथम : महा युद्ध पूर्व रात्रि ! भाग -2 : शौर्य - रूद्रा वार्तालाप

यहाँ पढ़े:  शौर्य: सत्य की खोज - परिचय खंड - प्रथम : महा युद्ध पूर्व रात्रि ! भाग 1 : अंतर वार्ता ! यहाँ पढ़े।  भाग -2 : शौर्य - रूद्रा वार्तालाप रूद्रा मेरा एक मात्र जीवित बचा शिष्य है। बाकि मेरे साथ आये सभी शिष्य इस युद्ध में मारे जा चुके है। रूद्रा के स्पर्श से अहसास हुआ कि मै कहाँ हूँ। मै हिमालय की पहाड़ियों में नही रेगिस्तान की ठंडक में हूँ।  रूद्रा को मैंने बैठने का इशारा किया। रूद्रा मेरे सामने जमीन पर बैठ गया। वह काफी विचलित लग रहा था। मुझे मालूम था की वह इस सब घटनाक्रम से विचलित है यह उसकी आखरी गुरु दीक्षा का उपयुक्त समय था। उसे धैर्य देते हुए कहा - "बेटा मुझे ज्ञात है कि पिछले कुछ समय में घटना क्रम बहुत तेजी से बदला है। कभी तूफान तो कभी ख़ामोशी , किसी भी व्यक्ति को तोड़ने के लिए पर्याप्त है। किसी को भी आत्म समर्पण करने को विवश कर देने में पर्याप्त है। किन्तु जिंदगी के यह पाठ इतने महत्वपूर्ण होते है कि अगर आप इनसे थोड़ा बहुत भी सीख पाते हो तो कभी भी जिंदगी में हार नही सकते। इस तरह के घटना क्रमो में चीज़ो को संतुलित करना मायने नही रखता और न ही कोई मनुष्य इ...