मेरा क्या जाता है, मै तो उसी को खुदा जान लूंगा
जब धर्म/महजब नही थे तब भी इंसान जिन्दा था जब कोई नही होगा तब भी जीवन होगा। कहत ये नास्तिक बंधू -न कोई आल्हा है न कोई राम न कोई जीसस है , झूठे है बाइबिल- वेद - कुरान यहाँ बसते है बस सैतान ही सैतान। अगर खून से खेलना ही है सबको तो उतार दो ये महजब का चोला। हिम्मत से लड़ो नास्तिक बनकर क्यों ओढ़ते हो ये धर्म /महजब का झोला। जो मुझमे है वो तुझमे भी है न तनिक है किसी को ज्यादा ज्ञान किसने तुझको बनाया, क्यों होता है सोच कर परेशान उतार कर देख ये नफरत की चादर मिट जायेगा ये तेरा सारा अज्ञान न तूने किसी को देखा न मैंने किसी को देखा न तुझसे पहले किसी ने देखा, न मेरे बाद कोई देखेगा फिर किसके लिए तू करता है ये सारे काम अगर दिखा सका तू मुझको, तो करूंगा तेरे धर्म को दंडवत प्रणाम न तेरा लिखा सही है , न मेरा लिखा सही है अगर तू लिखे हुए को सच कहता है , तो आज मेने भी खुद को खुदा लिख दिया तो क्या मै खुदा बन गया लिखा हुआ अगर सच होता तो आज न जाने कितने खुदा बन चुके होते ये तो सियासतों का जोर है पगले, जो खुदा का नाम बदलवाती है जिसका मन चाहे उसको खुदा लिखवाती ह...