शौर्य: सत्य की खोज खंड - प्रथम : महा युद्ध पूर्व रात्रि ! भाग -2 : शौर्य - रूद्रा वार्तालाप

यहाँ पढ़े: शौर्य: सत्य की खोज - परिचय

खंड - प्रथम : महा युद्ध पूर्व रात्रि !

भाग 1 : अंतर वार्ता ! यहाँ पढ़े। 

भाग -2 : शौर्य - रूद्रा वार्तालाप

रूद्रा मेरा एक मात्र जीवित बचा शिष्य है। बाकि मेरे साथ आये सभी शिष्य इस युद्ध में मारे जा चुके है। रूद्रा के स्पर्श से अहसास हुआ कि मै कहाँ हूँ। मै हिमालय की पहाड़ियों में नही रेगिस्तान की ठंडक में हूँ।  रूद्रा को मैंने बैठने का इशारा किया। रूद्रा मेरे सामने जमीन पर बैठ गया। वह काफी विचलित लग रहा था। मुझे मालूम था की वह इस सब घटनाक्रम से विचलित है यह उसकी आखरी गुरु दीक्षा का उपयुक्त समय था। उसे धैर्य देते हुए कहा -
"बेटा मुझे ज्ञात है कि पिछले कुछ समय में घटना क्रम बहुत तेजी से बदला है। कभी तूफान तो कभी ख़ामोशी , किसी भी व्यक्ति को तोड़ने के लिए पर्याप्त है। किसी को भी आत्म समर्पण करने को विवश कर देने में पर्याप्त है। किन्तु जिंदगी के यह पाठ इतने महत्वपूर्ण होते है कि अगर आप इनसे थोड़ा बहुत भी सीख पाते हो तो कभी भी जिंदगी में हार नही सकते। इस तरह के घटना क्रमो में चीज़ो को संतुलित करना मायने नही रखता और न ही कोई मनुष्य इन सब को संतुलित कर सकता है बल्कि सीखना ही हमारा ध्येय होना चाहिए।

जिंदगी का अंतिम सत्य केवल मृत्यु है। मृत्यु ही सभी दुखो का अंत है। इस न खत्म होने वाले संघर्ष का अंत है। हम सारा जीवन मृत्यु से दूर भागते है मगर मृत्यु हर क्षण हमारे पास आती है। हमेशा इस सत्य को याद रखना ताकि तुम मृत्यु से कभी न डरो  और जिंदगी के गुलाम बन कर न रह जाओ। कोई गुरू तुम्हे कुछ सीखा नही सकता और न ही किसी गुरू से तुम सिख  सकते हो तुम्हे  जो भी सिखाएगा यह समय सिखाएगा, तुम जो भी सीखोगे इस समय से सीखोगे। कल क्या होगा न मै जानता हूँ , न तुम और न ये सारे लोग , यहाँ तक की खुद यह क्षण नही जानता कि अगला क्षण क्या लेकर आयेगा। जो है इस पल में है , अगला कोई पल नही होता और न ही कोई पल होगा। "

मेरे पास कहने को और भी बहुत कुछ है । मगर मैं रूद्रा को कुछ समझ नही सकूँगा। मैंने उसे उसके स्थान पर जा कर सोने की अनुमति दी । अब केवल मैं और आसमान में चाँद ही रह गए थे, जिन्हें इस अँधेरी रात में नींद नही आ रही है । बचपन से लेकर आज तक चाँद से ही तो मैंने अपने मन की सभी बाते की है । मगर आज यह भी बादलो की ओट लेकर छुपने की कोशिश कर रहा हैं ।

सोचते सोचते कब भोर हो गयी, पता ही नही चला । बिल्कुल वैसे ही जैसे कब जन्म से मृत्यु के करीब आ गया, पता नही चला । सूर्य उदय के साथ ही मैं युद्ध भूमि में चला जाऊंगा और कभी लौट कर नही आऊंगा । मेरी जिंदगी इतिहास के पन्नों में कहीं खो जायेगी और इस दुनिया को कोई और शौर्य मिल जायेगा । हजारो सवाल मेरे मरते ही मेरे साथ मर जायेंगे ।

मेरे बाद मेरा उतराधिकारी रूद्रा होगा और इस युद्ध को तब तक जरी जारी रखेगा जब तक की या तो वह मर न जाये या हम जीत जीत न जाये । ये मेरी जिंदगी के आखिरी लम्हों के कुछ पन्नें है जो मेरी मौत के बाद रूद्रा को दे दिए जाये ताकि वह जान सके कि इस युद्ध में वो ही एक मात्र उम्मीद है । 

इस युद्ध को अपनी पूरी ताकत और आत्म विश्वास से लड़ना मेरे बच्चे ! 
हो सकेगा तो अगले जन्म् में मिलेंगे। तब तक के लिए अलविदा ! 

---–-----------------

इस शख्स की जीवन गाथा यही खत्म नही होती । इसके जीवन के उतार चढ़ाव और व्यक्तित्व को के बदलाव को समझना उतना ही मुश्किल है जितना खुद के जीवन के उतार चढ़ाव और व्यक्तित्व को समझना है ।


Comments

Popular posts from this blog

शौर्य: सत्य की खोज परिचय

शौर्य: सत्य की खोज खण्ड - द्वितीय : शौर्य - एक ढोंगी व्यक्तित्व ! भाग - 1 : गांव का आश्रम !

शौर्य: सत्य की खोज - परिचय खंड - तृतीया : लेखक का सफर : शौर्य का सच !